अभिनेता शैलेश रामुगाडे ने छात्रों का किया समर्थन, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की उठाई मांग

अभिनेता शैलेश रामुगाडे ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही चिंताओं के बीच छात्रों का समर्थन करते हुए कहा है कि उनकी आवाज़ को संवेदनशीलता और गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनका कहना है कि छात्र कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे केवल एक ऐसी निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था चाहते हैं, जहाँ उनकी मेहनत का सम्मान हो।
अपने विचार साझा करते हुए शैलेश रामुगाडे ने कहा:
“छात्र बहुत ज़्यादा कुछ नहीं मांग रहे हैं। वे सिर्फ़ ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जहाँ उन्हें अपनी मेहनत पर भरोसा हो। परीक्षाएँ पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और यदि कहीं कोई गलती होती है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
हज़ारों छात्र और उनके माता-पिता वर्षों तक मेहनत करते हैं, इस उम्मीद के साथ कि ये परीक्षाएँ उनके भविष्य को सही दिशा देंगी। फिर ऐसा क्यों हो कि उनकी बात गंभीरता से तभी सुनी जाए, जब उन्हें सड़कों पर उतरना पड़े?
यदि सरकार और छात्रों के बीच उचित संवाद हो तथा निष्पक्ष जांच के साथ समय पर कार्रवाई की जाए, तो कई समस्याओं का समाधान विरोध-प्रदर्शन की नौबत आने से पहले ही किया जा सकता है। छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए, क्योंकि यह उनके भविष्य का सवाल है।
मुझे लगता है कि हर राजनीतिक दल और हर राजनेता को स्वयं से एक सवाल पूछना चाहिए। ये सिर्फ़ छात्र नहीं हैं, बल्कि किसी के बेटे-बेटियाँ हैं।
किसी भी व्यक्तिगत स्वार्थ या राजनीतिक एजेंडे से ऊपर उठकर इन छात्रों के साथ खड़े हों—सिर्फ़ एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि कम-से-कम एक अभिभावक के रूप में। आज यह उनके भविष्य की बात है, कल यह हमारे अपने बच्चों का भविष्य भी हो सकता है।
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳”
शैलेश रामुगाडे का मानना है कि यह मुद्दा केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हज़ारों युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है। उनका विश्वास है कि छात्रों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जो निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित हो तथा उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान समय पर कार्रवाई और सार्थक संवाद के माध्यम से किया जाए।
उन्होंने समाज से भी अपील की कि इस विषय को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए। उनका कहना है कि हर छात्र किसी परिवार के सपनों का प्रतिनिधित्व करता है और उनकी चिंताओं को संवेदनशीलता एवं ज़िम्मेदारी के साथ लिया जाना चाहिए।
अपने इस संदेश के माध्यम से शैलेश रामुगाडे ने छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग की है, जहाँ योग्यता की रक्षा हो, शिक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास और मज़बूत हो तथा हर छात्र की आवाज़ को सम्मानपूर्वक सुना जाए।